यदि कुंडली के लग्न भाव में राहु विराजमान हो और सप्तम भाव में केतु ग्रह उपस्थित हो तथा बाकी ग्रह राहु-केतु के एक ओर स्थित हों तो कालसर्प दोष योग का निर्माण होता है। 

काल सर्प दोष से प्रभावित जातक को सपने में सांप और पानी दिखाई देने के साथ-साथ स्‍वयं को हवा में उड़ते देखना, कार्यों में बार-बार अड़चनें आती हैं और साथ ही इनके विचारों में बार-बार बदलाव आते हैं और कोई भी काम करने से पहले मन में नकारात्‍मक विचार आते हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगता। यह जातक नशा करते हैं।

कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजन की अनेक विधि हैं। सबसे उत्तम विधि वैदिक मंत्रों द्वारा किया जाने वाला विधान है। भगवान शिव की आराधना द्वारा संभव है। भगवान शिव सर्पों को अपने गले में धारण करते हैं इसलिए शिव जी की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्‍न होते हैं और संपूर्ण पाप नष्‍ट होते हैं।

1- यह पूजा अथवा अनुष्‍ठान कराने से आपके महत्‍वपूर्ण कार्य संपन्‍न होते हैं। 2- इस पूजा के प्रभाव से आपके जितने भी रुके हुए काम हैं वो पूरे हो जाते हैं। 3- शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। 4- नौकरी, करियर और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है।

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